भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इसे महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता पर “क्रूर आर्थिक हमला” बताया है।रायपुर में जारी प्रेस विज्ञप्ति में राज्य परिषद सदस्य पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पहले से ही खाद्यान्न और दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और आर्थिक विकास की रफ्तार भी धीमी हो चुकी है। लघु एवं मध्यम उद्योग संकट का सामना कर रहे हैं, जबकि मजदूरों की आय में महंगाई के हिसाब से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। पार्टी ने सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते निजीकरण पर भी चिंता जताई।सीपीआई ने प्राकृतिक संसाधनों और खनिज क्षेत्रों में बढ़ते कॉरपोरेट दखल को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का आरोप है कि स्थानीय समुदायों और आदिवासी समाज के विरोध के बावजूद खदानों और बड़ी परियोजनाओं को उद्योगपतियों को सौंपा जा रहा है। इससे जल-जंगल-जमीन, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है।पार्टी ने मांग की है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की हालिया मूल्यवृद्धि तुरंत वापस ली जाए। साथ ही खनिज नीति में ग्रामसभा की सहमति को अनिवार्य बनाने, वनों की कटाई रोकने, पर्यावरणीय मूल्यांकन को सख्ती से लागू करने और शिक्षा-स्वास्थ्य के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पार्टी मेहनतकश जनता के हित में जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

