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मौका देने के लिए PM मोदी का धन्यवाद’, अभिजीत दीपके के इस्तीफे वाले पोस्ट पर बवाल

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के बालाघाट में संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सरकार पर तंज कसा है। बालाघाट दौरे के दौरान कुछ यूट्यूब पत्रकारों ने उनकी कार को घेरकर सवाल किया कि क्या वह बच्चों की मौत पर राजनीति करने आए हैं। इसके बाद दीपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री मानते हुए इस्तीफे का पत्र सोशल मीडिया पर साझा कर दिया।

दीपके ने अपने पोस्ट में लिखा कि वह तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि, यह एक व्यंग्यात्मक बयान है और दीपके मध्य प्रदेश के वास्तविक मुख्यमंत्री नहीं हैं। उनका मकसद राज्य सरकार और व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल उठाना था।

बच्चों की मौत का हवाला देकर सरकार पर निशाना

अपने कथित इस्तीफे में दीपके ने बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि अगर वह मुख्यमंत्री होते तो इन बच्चों को समय पर जरूरी इलाज और मदद नहीं मिल पाने की जिम्मेदारी उनकी होती।

उन्होंने मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाया। दीपके के मुताबिक, शुरुआत में प्रत्येक बच्चे के परिवार के लिए 2 लाख रुपए की सहायता घोषित की गई थी, जिसे आदिवासी समुदाय के विरोध के बाद बढ़ाकर 4 लाख रुपए किया गया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि अगर मृतक बच्चे मंत्री या विधायक के परिवार से होते तो क्या इतनी ही राशि को पर्याप्त माना जाता?

दीपके ने कहा कि बच्चों की मौत के मामले में सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं में शासन के शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पानी और शिक्षा की व्यवस्था पर भी सवाल

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हर घर नल’ योजना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बालाघाट के कुछ हिस्सों में अब भी आदिवासी परिवार पीने के पानी के लिए नदी पर निर्भर हैं।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए। दीपके ने कहा कि कुछ गांवों में स्कूलों की स्थिति बेहद खराब है और एक गांव में आंगनवाड़ी से लेकर कक्षा 5 तक के करीब 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं।

उनका आरोप था कि स्थानीय आदिवासी समुदाय की ओर से बार-बार मांग किए जाने के बावजूद पर्याप्त स्कूल भवन उपलब्ध नहीं कराया गया।

बिजली, अपराध और कुपोषण के आंकड़े गिनाए

दीपके ने अपने बयान में सरकार से जुड़े कुछ आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में 55,795 आदिवासी परिवारों के घरों में बिजली नहीं है।

उन्होंने NCRB के आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि देश में अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ दर्ज अपराधों में करीब 32 प्रतिशत मामले मध्य प्रदेश से जुड़े हैं। इसके अलावा उन्होंने राज्य में 5.41 लाख से ज्यादा बच्चों के कम वजन के होने और विधानसभा में पेश आंकड़ों के आधार पर 1.36 लाख से ज्यादा बच्चों के कुपोषित के रूप में दर्ज होने का दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।

प्रधानमंत्री को भी दिया व्यंग्यात्मक धन्यवाद

दीपके ने अपने इस्तीफे वाले पोस्ट के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रधानमंत्री को मध्य प्रदेश की जनता की सेवा का मौका देने के लिए धन्यवाद कहा।

उन्होंने कहा कि 2003 से मध्य प्रदेश में लंबे समय से बीजेपी की सरकारें रही हैं, इसके बावजूद कई आदिवासी परिवारों को साफ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और अच्छी शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

बालाघाट में बच्चों की मौत के मुद्दे को लेकर दीपके का यह बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उनके ‘मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे’ वाले पोस्ट को वास्तविक राजनीतिक इस्तीफे के बजाय सरकार की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर किया गया व्यंग्य माना जा रहा है।

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