मानिकपुर खदान विस्तार पर जनसुनवाई, 27 लिखित आपत्तियां दर्ज, 5 से 7 लाख टन होगी प्रस्तावित क्षमता, विकास के साथ विस्थापन और पर्यावरण के मुद्दे भी उठे

कोरबामानिकपुर ओपन कास्ट खदान की उत्पादन क्षमता विस्तार को लेकर शुक्रवार को पर्यावरण जनसुनवाई आयोजित की गई। खदान की क्षमता वर्तमान 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 7 लाख मीट्रिक टन किए जाने के प्रस्ताव पर क्षेत्र के ग्रामीणों, प्रभावित परिवारों और अन्य लोगों ने अपनी आपत्तियां एवं सुझाव रखे। जनसुनवाई में करीब 500 लोग शामिल हुए। इस दौरान कुल 27 लिखित आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जबकि मौखिक रूप से रखे गए सुझावों और आपत्तियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। जनसुनवाई में कुछ लोगों ने प्रस्तावित विस्तार का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्र के विकास और रोजगार से जोड़कर देखा। वहीं प्रभावित ग्रामीणों ने विस्थापन, पुनर्वास और पर्यावरण से जुड़े सवाल उठाते हुए कहा कि नए विस्तार से पहले पुराने मामलों का निराकरण किया जाना चाहिए। पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी कर विकास नहीं होना चाहिए। उन्होंने जनसुनवाई को महज औपचारिकता नहीं बनाने तथा लंबे समय से लंबित विस्थापन और पुनर्वास संबंधी मामलों के निराकरण के लिए ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने की मांग की। प्रभावित ग्रामीणों का कहना था कि मानिकपुर खदान के पूर्व विस्तार और विस्थापन से जुड़े कई मामले अब भी लंबित हैं। ऐसे में प्रस्तावित क्षमता विस्तार से पहले लंबित मुआवजा, पुनर्वास और अन्य अधिकार संबंधी मामलों का समाधान किया जाना जरूरी है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि नए विस्तार के साथ प्रभावित परिवारों की संख्या और समस्याएं बढ़ सकती हैं।

जनसुनवाई के दौरान कुछ लोगों ने पर्याप्त समय नहीं दिए जाने की शिकायत भी की। हालांकि प्रशासन की ओर से बताया गया कि जनसुनवाई सुबह 11 बजे शुरू हुई और उपस्थित लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।मानिकपुर खदान विस्तार को लेकर हुई जनसुनवाई में एक ओर उत्पादन, विकास और रोजगार बढ़ाने के पक्ष में आवाजें उठीं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवारों ने विस्थापन, पर्यावरण और पुराने लंबित मामलों के निराकरण को प्राथमिकता देने की मांग की। अब जनसुनवाई में दर्ज लिखित एवं मौखिक आपत्तियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

13 मांगों का पत्र सौंपा

इधर, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 13 मांगें रखीं। संगठन और प्रभावित ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि मानिकपुर खदान के प्रस्तावित विस्तार से पहले पुराने विस्थापन एवं पुनर्वास से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।

मौखिक आपत्तियां भी होंगी रिकॉर्ड का हिस्सा

अतिरिक्त कलेक्टर देवेंद्र पटेल ने बताया कि जनसुनवाई में 27 लिखित आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा लोगों द्वारा मौखिक रूप से रखे गए सुझावों और आपत्तियों की वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई है। इन मौखिक आपत्तियों को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाकर आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

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