
जांजगीर-चांपा के जिला अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध जताया। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ नर्स द्वारा गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ी और बाद में उसकी मौत हो गई। हालांकि, इंजेक्शन और महिला की मौत के बीच सीधा संबंध जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जानकारी के अनुसार, अफरीद गांव की रहने वाली महिला को 24 सितंबर को प्रसव के लिए जांजगीर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 25 सितंबर को महिला ने सामान्य प्रसव के जरिए बच्चे को जन्म दिया। परिजनों के मुताबिक प्रसव के बाद शुरुआत में महिला की हालत सामान्य थी, लेकिन इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। 27 सितंबर की रात महिला की मौत हो गई।

महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था और उपचार को लेकर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान स्टाफ नर्स द्वारा गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद महिला की हालत बिगड़ी थी। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला की मौत के बाद उन्हें पोस्टमार्टम कराए बिना शव घर ले जाने के लिए कहा गया। इसको लेकर अस्पताल परिसर में विवाद और विरोध की स्थिति बन गई। परिवार का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण की जानकारी के लिए मामले की उचित जांच जरूरी है।
मृतका के पीछे नवजात बच्चा रह गया है। मां की मौत के बाद बच्चे के पालन-पोषण को लेकर परिवार के सामने बड़ी चिंता खड़ी हो गई है। परिजनों ने नवजात की परवरिश के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी प्रशासन से की है।
फिलहाल मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। महिला की मौत का वास्तविक कारण क्या था और उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा। अस्पताल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





