बंद ऋतु में मत्स्याखेट पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, संघर्ष समिति ने मत्स्य महासंघ को सौंपा ज्ञापन

कोरबा हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय क्षेत्र के विस्थापित आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा परिवारों के हितों की रक्षा तथा जलाशय में मत्स्य संसाधनों के संरक्षण को लेकर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। हसदेव जलाशय क्षेत्र की 22 पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के संयुक्त संगठन विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति ने छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी मत्स्य महासंघ मर्यादित, रायपुर के प्रबंध संचालक के नाम ज्ञापन सौंपकर आगामी बंद ऋतु के दौरान जलाशय में किसी भी प्रकार के मत्स्याखेट पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने की मांग की है।संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मत्स्य विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष मछलियों के संरक्षण एवं प्रजनन को ध्यान में रखते हुए 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को बंद ऋतु (क्लोज सीजन) घोषित किया जाता है। इस दौरान नदियों, जलाशयों और प्राकृतिक जल स्रोतों में मछली पकडऩे पर प्रतिबंध लगाया जाता है ताकि मछलियों को प्राकृतिक रूप से प्रजनन करने का अवसर मिल सके और मत्स्य संपदा का संतुलन बना रहे।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से बंद ऋतु के दौरान भी हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय में कुछ ठेकेदारों एवं बाहरी तत्वों द्वारा मत्स्याखेट किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे शासन द्वारा बनाए गए संरक्षण संबंधी नियमों की अनदेखी होती है तथा जलाशय की जैव विविधता और मत्स्य संसाधनों को नुकसान पहुंचता है।समिति का कहना है कि यदि प्रजनन काल में मछलियों का शिकार जारी रहता है तो मछलियों की संख्या में लगातार कमी आती है, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन प्रभावित होता है। इसका सीधा असर उन हजारों परिवारों पर पड़ता है जिनकी आजीविका पूरी तरह जलाशय और मत्स्य व्यवसाय पर निर्भर है।समिति ने कहा कि बंद ऋतु केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं बल्कि मत्स्य संसाधनों के संरक्षण की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इस अवधि में अधिकांश मछलियां अंडे देती हैं और नई पीढ़ी का विकास होता है। यदि इस दौरान मत्स्याखेट किया जाता है तो मछलियों के प्रजनन चक्र पर गंभीर प्रभाव पड़ता है, जिससे आने वाले वर्षों में मत्स्य उत्पादन घट सकता है।समिति ने यह भी कहा कि जलाशय क्षेत्र में रहने वाले विस्थापित आदिवासी एवं पारंपरिक मछुआरा परिवार लंबे समय से मत्स्य व्यवसाय के माध्यम से अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। ऐसे में मत्स्य संसाधनों का संरक्षण उनकी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। समिति ने मांग की है कि 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय में किसी भी प्रकार के मत्स्याखेट पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए। इसके लिए संबंधित ठेकेदारों, मत्स्य समितियों तथा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।इसके साथ ही जलाशय क्षेत्र में विशेष निगरानी दल गठित कर नियमित गश्त कराई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

समिति का कहना है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगाद्य ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर कोरबा, पुलिस अधीक्षक कोरबा तथा सहायक संचालक मत्स्य विभाग, कोरबा को भी भेजी गई है, ताकि बंद ऋतु के दौरान मत्स्य संरक्षण संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

समिति ने उम्मीद जताई है कि शासन एवं प्रशासन जलाशय क्षेत्र के मछुआरा परिवारों की भावनाओं और मत्स्य संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को समझते हुए समय रहते आवश्यक कदम उठाएगा, जिससे हसदेव (मिनीमाता बांगो) जलाशय में जैव विविधता की रक्षा हो सके और भविष्य में मत्स्य उत्पादन में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो

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