
कोरबाछत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन द्वारा कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सोमवार को ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ अभियान के अंतर्गत मुख्य अभियंता कार्यालय कोरबा पश्चिम (उत्पादन) में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सैकड़ों नियमित, संविदा व ठेका कर्मचारियों ने पैदल रैली, ढोल-नगाड़ों, नारेबाजी और आमसभा के माध्यम से अपनी मांगों के प्रति प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया। यूनियन की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली, संविदा कर्मियों का नियमितीकरण, ठेका प्रथा की समाप्ति, प्रीमियम रहित कैशलेस चिकित्सा सुविधा, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, 1 अप्रैल 2026 से देय वेज रिवीजन के लिए समिति गठन, कोरबा में निमार्णाधीन 1320 मेगावाट विद्युत संयंत्र में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार तथा तृतीय व चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के लिए करियर प्रोग्रेशन योजना का तत्काल क्रियान्वयन शामिल हैं। आमसभा के पश्चात प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी, मुख्य अतिथि पीके पाठक व केंद्रीय पर्यवेक्षक एजे सिंह के नेतृत्व में कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत कंपनी के अध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह (आईएएस) के नाम मुख्य अभियंता को ज्ञापन सौंपा। सभा को टीपी गुप्ता, वेदराम निर्मलकर, ओमप्रकाश सूर्यवंशी, संजय कौशिक, गेंदराम साहू, लक्ष्मी प्रसाद यादव सहित अनेक वक्ताओं ने भी संबोधित किया। जनता यूनियन द्वारा मई में प्रथम चरण के अंतर्गत जनप्रतिनिधि संपर्क अभियान चलाकर प्रदेश के 65 से अधिक विधायक, मंत्री व सांसदों को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। वर्तमान में आंदोलन के द्वितीय चरण ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ अभियान के तहत प्रदेशभर में क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम जारी है। कार्यक्रम में कोरबा, कटघोरा, पाली व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में नियमित, संविदा व ठेका कर्मचारी शामिल हुए। प्रांताध्यक्ष श्री द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा करने में लगातार हो रही देरी से कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। यदि कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी। श्री पाठक ने कहा कि प्रबंधन की उदासीनता के कारण कर्मचारियों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए ढोल बजाओ, प्रबंधन जगाओ जैसे प्रतीकात्मक आंदोलन करने पड़ रहे हैं। उन्होंने विद्युत कंपनियों में छह हजार से अधिक रिक्त पदों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि नियमित भर्ती नहीं होने से उत्पादन व वितरण व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
ओपीएस का लाभ नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण
केंद्रीय पर्यवेक्षक श्री सिंह ने कहा कि ढोल बजाना केवल एक प्रतीक है। वास्तव में कर्मचारी स्वयं को उपेक्षित और शोषित महसूस कर रहा है, जिसके कारण उसे विरोध के ऐसे अनोखे तरीके अपनाने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भी विद्युतकर्मियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रांतीय उपाध्यक्ष सम्मेलाल श्रीवास ने कहा कि अंबिकापुर से शुरू हुआ यह आंदोलन बस्तर तक गूंजेगा और तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेता।
