नई दिल्ली। देशभर में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के बीच लोकसभा ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित कर दिया है। इस विधेयक के माध्यम से पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इस संशोधन के बाद केंद्र सरकार को भविष्य में UPI और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों पर शुल्क तय करने का कानूनी अधिकार मिल गया है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल आम लोगों के UPI लेनदेन पर कोई नया चार्ज नहीं लगाया गया है और न ही तत्काल ऐसा कोई निर्णय लागू हुआ है।
सोशल मीडिया पर बिल पारित होने के बाद यह दावा तेजी से वायरल हुआ कि अब UPI से भुगतान करने पर आम लोगों से शुल्क वसूला जाएगा। लेकिन वास्तविकता यह है कि अभी तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले सामान्य UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।
क्या है नया संशोधन?
लोकसभा में पारित विधेयक के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की उन कानूनी व्यवस्थाओं में बदलाव किया गया है, जिनके कारण डिजिटल भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अन्य शुल्क लगाने में कानूनी बाधा थी। अब यह बाधा समाप्त कर दी गई है, जिससे भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर सरकार शुल्क से संबंधित नियम बना सकेगी।
इसका अर्थ यह नहीं है कि बिल पारित होते ही UPI पर चार्ज लागू हो गया है, बल्कि सरकार के पास भविष्य के लिए नीति बनाने का अधिकार उपलब्ध हो गया है।
फिलहाल आम जनता पर क्या असर पड़ेगा ?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम उपभोक्ताओं के लिए कोई बदलाव नहीं हुआ है।
– व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पहले की तरह पूरी तरह फ्री रहेंगे।
– बैंक खाते में पैसे भेजने या किसी परिचित को UPI से भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
– रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान की वर्तमान व्यवस्था में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
इसलिए आम लोगों को घबराने या किसी प्रकार की अफवाह पर विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है।
मर्चेंट पेमेंट पर क्या हो सकता है बदलाव ?
विधेयक के बाद भविष्य में सरकार कुछ विशेष श्रेणी के व्यावसायिक (Merchant) UPI भुगतान पर MDR लागू करने पर विचार कर सकती है।
प्रारंभिक चर्चाओं के अनुसार—
– 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर
– 0.25% से 0.40% तक MDR निर्धारित किया जा सकता है।
हालांकि यह शुल्क आम ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी किस पर होगी—व्यापारी, बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर—इसका अंतिम निर्णय अलग से जारी होने वाली अधिसूचना में स्पष्ट किया जाएगा।
सरकार को यह बदलाव क्यों करना पड़ा?
डिजिटल भुगतान प्रणाली के तेजी से विस्तार के साथ बैंक, पेमेंट कंपनियां और अन्य सेवा प्रदाता लंबे समय से UPI नेटवर्क के संचालन, रखरखाव और तकनीकी ढांचे की लागत का मुद्दा उठाते रहे हैं।
सरकार का कहना है कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कानून में संशोधन किया गया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए नई व्यवस्था बनाई जा सके। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में आम उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का निर्णय नहीं लिया गया है।
अंतिम फैसला अभी बाकी
UPI पर किसी भी प्रकार का शुल्क लागू करने से पहले केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ विस्तृत विचार-विमर्श करेगी। इसके बाद यदि कोई निर्णय लिया जाता है तो उसे अलग से अधिसूचना जारी कर लागू किया जाएगा।
जब तक ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक देशभर में सामान्य UPI लेनदेन पहले की तरह निःशुल्क जारी रहेंगे।
लोगों को क्या करना चाहिए?
सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों या अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय केवल सरकार, RBI और NPCI द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें। वर्तमान समय में UPI उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए किसी प्रकार का नया शुल्क लागू नहीं हुआ है।
निष्कर्ष
लोकसभा द्वारा पारित टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 भविष्य में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों पर शुल्क तय करने का कानूनी रास्ता खोलता है, लेकिन फिलहाल आम जनता के UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह निःशुल्क हैं। भविष्य में यदि किसी प्रकार का शुल्क लागू किया जाता है तो उसके लिए सरकार अलग से अधिसूचना जारी करेगी। तब तक सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं को किसी अतिरिक्त चार्ज की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
