
मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली को राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी, अंबुजा मॉल को 55 हजार रुपये देने का आदेशरायपुर। मॉल में खरीदारी या किसी अन्य काम से आने वाले उपभोक्ताओं से पार्किंग शुल्क वसूलने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने मॉल में पार्किंग के नाम पर शुल्क वसूली को अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना है। आयोग ने अंबुजा सिटी सेंटर मॉल (अंबुजा नियोटिया) प्रबंधन की अपील को खारिज करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को बरकरार रखा है। 30 रुपये पार्किंग शुल्क लेने से शुरू हुआ मामलारायपुर निवासी अंजिनेश शुक्ला से जुड़ा है। वे 15 जून 2025 को अपनी कार से अंबुजा मॉल पहुंचे थे। उनका कहना था कि वे अपनी माता को ड्रॉप करने के लिए मॉल गए थे, लेकिन उनसे 30 रुपये पार्किंग शुल्क लिया गया। उन्होंने मॉल प्रबंधन से निश्शुल्क ड्रॉप सुविधा के संबंध में बात की, लेकिन प्रबंधन ने ऐसी व्यवस्था होने से इनकार कर दिया। परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि वाहनों में लगे फास्टटैग से पार्किंग शुल्क स्वतः काटा जा रहा था। उनका तर्क था कि फास्टटैग के माध्यम से टोल राशि वसूलने का अधिकार अधिकृत संस्थाओं को ही है।मॉल प्रबंधन ने दिया यह तर्कमॉल प्रबंधन ने आयोग के सामने अपनी अपील में कहा कि मॉल एक व्यावसायिक परिसर है और सुरक्षा तथा रखरखाव जैसी सुविधाओं के लिए न्यूनतम 30 रुपये पार्किंग शुल्क लिया जाता है। प्रबंधन ने यह भी दावा किया कि यदि वाहन 10 मिनट के भीतर बाहर निकल जाता है तो पार्किंग शुल्क वापस कर दिया जाता है।हालांकि आयोग के सामने सुनवाई के दौरान मॉल प्रबंधन 10 मिनट की निश्शुल्क पार्किंग व्यवस्था से संबंधित पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं कर सका। आयोग ने पाया कि घटना के समय इस संबंध में कोई स्पष्ट बोर्ड या स्टिकर भी मौजूद नहीं था। दुकानदारों से पहले ही लिया जाता है मेंटेनेंस चार्जराज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी देखा कि मॉल प्रबंधन दुकानों से पहले ही मेंटेनेंस शुल्क वसूलता है। इसमें बिजली, पानी, एस्केलेटर, लिफ्ट और सुरक्षा गार्ड जैसी सुविधाओं से जुड़े खर्च शामिल हैं।आयोग ने कहा कि जब मॉल प्रबंधन दुकानों से इन सुविधाओं के लिए मेंटेनेंस चार्ज ले रहा है, तो मॉल में आने वाले उपभोक्ताओं को निश्शुल्क और सुरक्षित पार्किंग उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। ऐसे में उपभोक्ताओं से अलग से पार्किंग शुल्क वसूलना उचित नहीं माना जा सकता। 55 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेशराज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने 24 सितंबर 2026 को मामले में फैसला सुनाया। आयोग ने अंबुजा मॉल प्रबंधन की अपील को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।आयोग ने मॉल प्रबंधन को परिवादी को 50 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और 5 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया है। यानी कुल 55 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। 45 दिन में करना होगा भुगतानआयोग ने मॉल प्रबंधन को आदेश दिया है कि वह निर्णय के पालन के लिए 45 दिनों के भीतर 55 हजार रुपये का भुगतान करे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर आदेश की तारीख से भुगतान होने तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला मॉल में वाहन लेकर जाने वाले उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आयोग ने पार्किंग सुविधा और उससे जुड़े शुल्क को लेकर मॉल प्रबंधन की जिम्मेदारी को स्पष्ट किया है।





