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हिमालय में महाविनाश: खौफनाक सैलाब के बीच सीना ताने खड़ा रहा हरा मकान

नेपाल-चीन सीमा पर पहाड़ों से आई ‘सुनामी

काठमांडू, 29 अगस्त। नेपाल और चीन की सीमा पर प्रकृति के रौद्र रूप ने ऐसा भयानक तांडव मचाया है, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप उठती है। चारों तरफ से आती चीख-पुकार, ताश के पत्तों की तरह बहते गांव, उखड़े हुए विशालकाय पेड़ और कंक्रीट के मलबे में तब्दील हो चुके इलाके इस महाविनाश की भयावहता बयान कर रहे हैं। इस खौफनाक सैलाब के बीच से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया है।

तबाही के बीच कुदरत का ‘चमत्कार’

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उफनती नदी और गाढ़े मलबे के खतरनाक सैलाब के बीच हरे रंग का एक दो मंजिला मकान चट्टान की तरह डटकर खड़ा दिखाई दे रहा है। जहां आस-पास की मजबूत इमारतें, सड़कें और भारी पुल पानी के प्रचंड बहाव में चंद सेकंडों में बह गए, वहीं इस मकान की नींव को पानी की विनाशकारी धाराएं भी नहीं हिला सकीं।

इस हैरान कर देने वाले नजारे को देखकर दुनिया भर में लोग हैरान हैं। इंटरनेट पर लोग मकान का निर्माण करने वाले इंजीनियर और ठेकेदार की कारीगरी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। जहां कुछ लोग ठेकेदार को राष्ट्रीय पुरस्कार देने की मांग कर रहे हैं, वहीं कई लोग इसे कुदरत के कहर के बीच किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

बेबस परिवार और मौत का सैलाब

वायरल हो रहे दो मिनट के इस दिल दहला देने वाले वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पहाड़ों से भारी पत्थरों, लोहे के गाडरों और टिन की छतों को अपने साथ समेटे गाढ़े कीचड़ का विशाल सैलाब बहकर आ रहा है। यह मटमैला पानी हरे रंग के इस मकान को चारों तरफ से घेर लेता है।

घर की दूसरी मंजिल की बालकनी में एक पुरुष, एक महिला और एक छोटी बच्ची असहाय खड़े नजर आ रहे हैं। पूरा परिवार लाचारी से नीचे बहते उस मौत के सैलाब को देख रहा है। मलबे के साथ बहकर आ रहे बड़े-बड़े पत्थर बार-बार मकान के निचले ढांचे से टकरा रहे हैं, लेकिन दीवारें टस से मस नहीं हो रहीं। चारों तरफ अफरा-तफरी, चीख-पुकार और पानी का खौफनाक गर्जन सुनाई दे रहा है। बाहर निकलने का कोई रास्ता न होने के कारण यह परिवार अपने ही घर में कैद हो चुका है।

यह वीडियो सिर्फ एक मकान की मजबूती की कहानी नहीं, बल्कि बुधवार को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई उस प्राकृतिक आपदा की दर्दनाक गवाही भी है। ‘नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण’ के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों का आंकड़ा 600 के करीब पहुंच गया है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं।

राहत और बचाव कार्य के लिए प्रशासन ने 14,829 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 3,253 घायलों को सेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट कर काठमांडू समेत अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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