
कोरबा शहर के भीतर भारी
वाहनों
के दबाव को कम करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण पुल परियोजनाएं अब आगे बढ़ गई हैं। सर्वमंगला-तरदा मार्ग से भिलाईखुर्द के बीच हसदेव नदी पर बनने वाले 1320 मीटर लंबे पुल का टेंडर फाइनल हो गया है। करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस पुल का निर्माण दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। पुल बनने के बाद कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्र की कोयला खदानों से चांपा की ओर जाने वाले भारी वाहनों को शहर के भीतर से गुजरने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।
राज्य शासन पहले ही इस परियोजना के लिए 51 करोड़ 63 लाख 70 हजार रुपए की प्रशासकीय मंजूरी दे चुका है। प्रस्तावित पुल का निर्माण मौजूदा रेलवे ब्रिज के समानांतर किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी सेतु निर्माण ने इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। सबसे कम दर आने के आधार पर अशोक मित्तल को ठेका दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। रेट अप्रूवल के लिए प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया है। इसके साथ ही सर्वमंगला से पुरानी बस्ती के बीच करीब 13 करोड़ रुपए की लागत से लो हाइट ब्रिज भी बनाया जाएगा। इस परियोजना की मंजूरी मुख्यमंत्री स्तर से मिल चुकी है और इसके लिए भी सेतु निर्माण विभाग ने टेंडर जारी किया था। ब्रिज बनने के बाद पुरानी बस्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण भी कराया जाएगा, जिसकी मंजूरी मिल चुकी है। इन दोनों परियोजनाओं का सीधा असर शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर कोयला परिवहन से जुड़े भारी वाहनों के लिए नया वैकल्पिक मार्ग तैयार होने से शहर की प्रमुख सड़कों पर दबाव कम हो सकता है। वहीं सर्वमंगला-पुरानी बस्ती के बीच लो हाइट ब्रिज बनने से इस क्षेत्र के लोगों को शहर की ओर आने-जाने के लिए रेलवे फाटक या ओवरब्रिज पर निर्भरता कम होगी।
चांपा जाने वाले भारी वाहनों को मिलेगा सीधा रास्ता
हसदेव नदी पर बनने वाला नया पुल केवल एक यातायात परियोजना नहीं, बल्कि कोरबा के कोयला परिवहन नेटवर्क के लिए वैकल्पिक कॉरिडोर के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुसमुंडा, गेवरा और दीपका से निकलने वाले भारी
वाहन
सर्वमंगला-तरदा मार्ग से होते हुए चांपा की ओर सीधे आवाजाही कर सकेंगे। इससे शहर के अंदर भारी वाहनों की आवाजाही घटने और आम लोगों को यातायात में राहत मिलने की उम्मीद है।




