
कोरबा। जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों को पंजीयन और टोकन लेने की प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में टोकन एवं पंजीयन प्रक्रिया के लिए ABHA से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग किया जा रहा है। डिजिटल व्यवस्था से जहां प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है, वहीं स्मार्टफोन या डिजिटल जानकारी नहीं रखने वाले मरीजों के लिए यह व्यवस्था चुनौती बन रही है।जिला अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज के इलाकों से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। इनमें बुजुर्ग और ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिन्हें मोबाइल फोन, इंटरनेट या ऐप के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है। ऐसे मरीजों को ABHA ऐप अथवा डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से टोकन लेने के लिए परिजनों या अन्य लोगों की मदद लेनी पड़ती है।
डिजिटल व्यवस्था के कई फायदे
ABHA आधारित डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का उद्देश्य मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है। ABHA के माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से लिंक और साझा कर सकते हैं। इसमें लैब रिपोर्ट, डॉक्टर की पर्ची और अन्य स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से देखने एवं प्रबंधित करने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।वहीं, अस्पतालों में QR कोड के माध्यम से डिजिटल OPD पंजीयन की सुविधा से मरीजों को पंजीयन काउंटर पर लंबी कतार से बचाने और प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिल सकती है। हाल में देशभर में ABHA आधारित ‘Scan and Share’ के जरिए बड़ी संख्या में OPD पंजीयन किए जाने की जानकारी सामने आई है।डिजिटल रिकॉर्ड से मरीज की पिछली जांच, रिपोर्ट और उपचार संबंधी जानकारी भविष्य में आसानी से उपलब्ध हो सकती है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी साझा करने में भी सुविधा मिलती है।
स्मार्टफोन नहीं होने पर बढ़ रही परेशानी
हालांकि, डिजिटल व्यवस्था का लाभ तभी प्रभावी रूप से सभी मरीजों तक पहुंच सकता है, जब उन्हें इसका इस्तेमाल करने में परेशानी न हो। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि जिन लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है या जिन्हें मोबाइल चलाने की जानकारी नहीं है, उन्हें टोकन लेने में दिक्कत होती है।खासकर बुजुर्ग मरीजों को डिजिटल प्रक्रिया समझने और उसे पूरा करने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार उन्हें टोकन लेने के लिए इधर-उधर पूछताछ करनी पड़ती है, जिससे इलाज शुरू होने से पहले ही परेशानी बढ़ जाती है।
ग्रामीण और बुजुर्ग मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
जिला अस्पताल में दूर-दराज के गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई मरीज तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं। मोबाइल, इंटरनेट, ऐप और डिजिटल पंजीयन की जानकारी नहीं होने के कारण उन्हें अस्पताल की प्रक्रिया समझने में कठिनाई हो सकती है।ऐसे मरीजों के लिए डिजिटल व्यवस्था के साथ मानवीय सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि तकनीक की जानकारी नहीं होने के कारण कोई मरीज स्वास्थ्य सेवा से वंचित या अनावश्यक रूप से परेशान न हो।
हेल्प डेस्क या मैनुअल टोकन की मांग
मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल में ABHA अथवा डिजिटल टोकन व्यवस्था के साथ अलग हेल्प डेस्क और जरूरत पड़ने पर मैनुअल टोकन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाए। हेल्प डेस्क पर कर्मचारियों की सहायता मिलने से बुजुर्ग और डिजिटल प्रक्रिया से अनजान मरीज आसानी से पंजीयन करा सकेंगे।डिजिटल व्यवस्था निश्चित रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को तेज, व्यवस्थित और रिकॉर्ड आधारित बनाने की दिशा में उपयोगी पहल है। लेकिन इसके साथ ऐसे मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी जरूरी है, जो स्मार्टफोन, इंटरनेट या डिजिटल ऐप का इस्तेमाल नहीं कर सकते।मरीजों की सुविधा के लिहाज से सबसे बेहतर व्यवस्था वही होगी, जिसमें डिजिटल और पारंपरिक दोनों विकल्प साथ-साथ उपलब्ध हों, ताकि तकनीक सुविधा बने, परेशानी नहीं।

