कोरबा: कलेक्टर कुणाल दुदावत सख्त, राजस्व मामलों के निपटारे में देरी पर तहसीलदारों को नोटिस

कोरबा जिले में आम जनता से जुड़े जमीन और राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी प्रकरण बेवजह समय सीमा से बाहर नहीं होना चाहिए। विशेष रूप से नक्शा बटांकन के काम में धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्होंने जिले के सभी तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने तहसीलवार अविवादित व विवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, नक्शा बटांकन, अभिलेख शुद्धता, भू-अर्जन और ई-कोर्ट के प्रकरणों की बारीकी से समीक्षा की। बैठक में जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग, अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, अपर कलेक्टर (कटघोरा) ओंकार यादव सहित सभी एसडीएम और तहसीलदार उपस्थित थे।

नक्शा बटांकन में सुस्ती पर दिखे कड़े तेवर

अविवादित नामांतरण के आवेदनों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने सभी तहसीलदारों को स्पष्ट हिदायत दी कि वे लंबित मामलों को गंभीरता से लें। नक्शा बटांकन की धीमी रफ्तार पर नाखुशी जताते हुए उन्होंने पूरे जिले में अभियान चलाकर काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारी मैदानी स्तर पर सक्रियता और तत्परता दिखाएं। इस पूरे अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सभी अनुविभागीय अधिकारियों (SDM) को सौंपी गई है।

वर्षों से लंबित मामलों पर व्यक्तिगत ध्यान देने की हिदायत

प्रशासनिक अमले को सचेत करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जो मामले 1 से 3 वर्ष, 3 से 5 वर्ष या उससे भी अधिक समय से लंबित हैं, उनके निराकरण के लिए राजस्व अधिकारी व्यक्तिगत रूप से रुचि लें। विशेषकर भू-अर्जन (जमीन अधिग्रहण) और रिकॉर्ड में त्रुटि सुधार के आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। इसके अलावा, मसाहती ग्रामों के सर्वे और नक्शा प्रकाशन के कार्य में भी तेजी लाने को कहा गया है।

 डिजिटल गवर्नेंस और जन-कल्याणकारी योजनाएं

बैठक में जमीन के रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके तहत:

 🔹 पटवारियों के लिए डिजिटल सिग्नेचर, डिजिटल किसान किताब और आधार प्रविष्टि (सीडिंग) कार्यों के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

 🔹 स्वामित्व योजना के अंतर्गत बचे हुए गांवों में ड्रोन सर्वे का काम जल्द पूरा कर, अंतिम प्रकाशन के बाद डेटा को ‘भुइँया पोर्टल’ पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।

 🔹 वन अधिकार पट्टा (FRA) नामांतरण, रेल कॉरिडोर, राष्ट्रीय राजमार्ग और मुआवजा वितरण जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई।

जमीन से जुड़े मामले सिर्फ प्रशासनिक आंकड़े नहीं होते, बल्कि ये आम नागरिकों की आजीविका, मानसिक शांति और सामाजिक सुरक्षा से सीधे जुड़े होते हैं। एक आम किसान या जमीन मालिक के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काटना बेहद थकाऊ और निराशाजनक होता है। कोरबा कलेक्टर द्वारा समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की बंदिश और लापरवाही पर नोटिस देने की कार्रवाई, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक जरूरी कदम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कड़े रुख के बाद मैदानी स्तर पर अटके हुए मामलों को कितनी जल्दी गति मिलती है।

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