पीवी एप से गिरदावरी अनिवार्य, किसानों की बढ़ी चिंता / लाइव फोटो के बाद ही एमएसपी पर धान बिक्री, पुराने नक्शे और तकनीकी खामियों से सत्यापन में अड़चन

कोरबा खरीफ सत्र 2026-27 में फसल गिरदावरी के लिए पीवी (फिजिकल वेरिफिकेशन) एप से भौतिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने के बाद इसे लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। पीवी एप के माध्यम से खेत में लगी धान की फसल का लाइव फोटो अपलोड करने के बाद ही गिरदावरी सत्यापन मान्य होगा। इसके बाद ही किसान अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेच सकेंगे।

वर्तमान में खेतों में खरीफ की फसल लगी है और कई क्षेत्रों में खेतों में पानी भरा हुआ है। वहीं अनेक गांवों में खसरों की गिरदावरी बाकी है। किसानों का कहना है कि यदि गिरदावरी गलत या अधूरी रही तो धान सहित अन्य खरीफ फसलों को समर्थन मूल्य पर बेचने में परेशानी हो सकती है। पुरानी व्यवस्था के तहत भुईयां पोर्टल और डीएससी के माध्यम से गिरदावरी कराने की मांग भी उठ रही है। पिछले सीजन में भी पीवी एप से फसल सत्यापन के दौरान कई किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। धान खरीदी के समय जिन खसरों का डिजिटल सत्यापन नहीं हुआ, उनसे किसानों को धान बेचने में परेशानी हुई थी। कई मामलों में किसानों का रकबा भी कम दिखाई देने की शिकायत सामने आई थी। किसानों के अनुसार पीवी एप में पुराने नक्शे के आधार पर खसरे की पहचान करने में परेशानी आ रही है। मौजूदा नक्शे में कई स्थानों पर हुए नक्शा विभाजन अब तक दर्ज नहीं होने से मौके पर खेत और खसरे का सही मिलान करने में तकनीकी दिक्कत आ सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका है कि समय पर और सही तरीके से सत्यापन नहीं होने पर खरीफ फसल की बिक्री के समय उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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