
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद कोरबा, छत्तीसगढ़
दिनांक: 19 अगस्त 2026
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव कामरेड पवन कुमार वर्मा ने कहा कि लोकतंत्र का मूल आधार असहमति का अधिकार है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति और विरोध की स्वतंत्रता देता है।
किंतु वर्तमान में इस संवैधानिक अधिकार पर गंभीर संकट है। UAPA जैसे कठोर कानूनों, ED-CBI जैसी एजेंसियों के कथित दुरुपयोग और न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण असहमति की आवाज़ को दबाने का प्रयास हो रहा है। छात्रों के शांतिपूर्ण धरने, भूख हड़ताल और पुस्तकालय जैसी गतिविधियों को भी “उकसावा” बताकर दमन किया जा रहा है।
इसी संदर्भ में बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति माधव जामदार का हालिया फैसला महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने SDPI नेता सईद अहमद चौधरी के खिलाफ जारी तड़ीपार आदेश को “दूषित और दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए रद्द कर दिया।
न्यायमूर्ति जामदार ने कहा कि “विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। ‘सरकार मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाने पर तड़ीपार नहीं किया जा सकता। पुलिस जनता की सेवक है।”
कोर्ट ने माना कि केवल नीतिगत विरोध के कारण तड़ीपार करना अनुच्छेद 19 और 21 का सीधा उल्लंघन है।
यह फैसला प्रशासनिक तंत्र के लिए आत्ममंथन का अवसर है।
हम मांग करते हैं कि असहमति को अपराधीकरण करने की प्रवृत्ति पर रोक लगे और संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
जारीकर्ता:
पवन कुमार वर्मा
जिला सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला परिषद कोरबा, छत्तीसगढ़





