
जांजगीर-चांपाजिले के हथनेवरा गांव में रेत खदान के लिए जारी टेंडर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि बिना वैध और अंतिम रूप से स्वीकृत डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट (DSR) के किसी भी खनन गतिविधि या रेत खदान की नीलामी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
दरअसल, राज्य सरकार के खनिज संसाधन विभाग ने 30 मार्च 2026 को जांजगीर-चांपा जिले के खपरीडीह, हथनेवरा, हाधा और करनीद गांवों में साधारण रेत खदानों के पट्टे के लिए ई-ऑक्शन टेंडर जारी किया था। ग्राम पंचायत हथनेवरा के सरपंच ने इस प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट शर्मिला सिंघई ने पक्ष रखते हुए कहा कि टेंडर जारी करने से पहले कलेक्टर से स्वीकृत DSR प्राप्त नहीं की गई थी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के “गौरव कुमार” मामले का हवाला देते हुए बताया कि वैध DSR खनन पट्टा जारी करने की अनिवार्य शर्त है।

याचिका में यह भी कहा गया कि वर्ष 2025 की जिस DSR का हवाला सरकार दे रही है, वह केवल ड्राफ्ट रिपोर्ट थी, जिसे अंतिम मंजूरी नहीं मिली थी। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने दलील दी कि DSR को सार्वजनिक डोमेन में जारी किया गया था और उस पर कोई आपत्ति नहीं आई थी। सरकार ने यह भी आशंका जताई कि याचिका के पीछे अवैध खनन से जुड़े लोगों का हाथ हो सकता है।
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि सरकार यह साबित नहीं कर सकी कि DSR को सक्षम अधिकारी द्वारा अंतिम मंजूरी दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि केवल ड्राफ्ट DSR के आधार पर पर्यावरणीय स्वीकृति या खनन अनुमति नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर हथनेवरा गांव का टेंडर निरस्त कर दिया गया। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को वैध DSR तैयार कर नियमानुसार नई टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की छूट भी दी है।
