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KORBA:11 वर्ष से अनुपस्थित कर्मचारी को दोबारा ज्वाइनिंग देने का आदेश विवादों में, प्रभारी DEO पर नियमों की अनदेखी के आरोप

कोरबा जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (मूल पद प्राचार्य) टी.पी. उपाध्याय एक बार फिर अपने एक प्रशासनिक आदेश को लेकर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने लगभग 11 वर्षों से बिना सूचना के सेवा से अनुपस्थित एक कर्मचारी को पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति जारी कर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिया। मामले की शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग तक पहुंच गई है और आदेश की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कुदुरमाल में पदस्थ भृत्य रायसिंह जगत 22 नवंबर 2014 से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। लगभग 11 वर्ष बाद उन्होंने 3 सितंबर 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पुनः सेवा में लिए जाने का आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा 26 सितंबर 2025 को आदेश जारी कर उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी गई।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इतने लंबे समय तक अनधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में निर्णय लेने का अधिकार जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं है। उनका दावा है कि ऐसे मामलों में सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी तथा शासन स्तर पर विधिवत परीक्षण के बाद ही निर्णय लिया जा सकता है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आदेश जारी करते समय सेवा नियमों एवं वित्त विभाग के स्थायी वित्तीय निर्देशों की अनदेखी की गई।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि तीन वर्ष अथवा उससे अधिक अवधि तक लगातार अनधिकृत अनुपस्थिति के मामलों में प्रक्रिया शासन स्तर पर निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई जाती है। ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है तथा अंतिम निर्णय शासन के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा सीधे पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति जारी किए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

सेवा नियमों के जानकारों का कहना है कि इतने लंबे समय तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारी के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं अवधि को माफ नहीं कर सकते। यदि किसी कर्मचारी की पुनर्बहाली पर विचार किया भी जाता है तो वह सक्षम नियुक्ति प्राधिकारी एवं शासन के निर्णय के बाद ही संभव होती है। ऐसे मामलों में, यदि शासन पुनः सेवा में लेने की अनुमति देता है, तब भी अनुपस्थिति की अवधि का वेतन स्वाभाविक रूप से देय नहीं होता और उसका निर्णय भी नियमानुसार अलग से किया जाता है।

पूरे मामले की शिकायत स्कूल शिक्षा विभाग से करते हुए संबंधित आदेश की जांच तथा नियमों के विरुद्ध आदेश जारी किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग शिकायत पर क्या निर्णय लेता है और आदेश जारी करने की प्रक्रिया की जांच किस स्तर पर कराई जाती है।

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