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जिले के प्रसिद्ध पिकनिक स्थलों पर बरसात के दौरान बरतें विशेष एहतियात, प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठाना कहीं बन ना जाए जानलेवा

बारिश में खूबसूरती नहीं, खतरा भी दिखता हैइसलिए रहें सावधान

उफनते झरने, फिसलन भरी चट्टानें और गहराता पानी बन सकता है जानलेवा

देवपहरी, परसखोला, केंदई, फुटहामुड़ा, सतरेंगा और अन्य पिकनिक स्थलों पर बरसात के दौरान बरतें विशेष एहतियात

कोरबा  मानसून में बारिश के साथ कोरबा जिले के जलप्रपात और पिकनिक स्थल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण लोगों को सबसे अधिक आकर्षित करते हैं। पहाड़ों से उतरता दूधिया पानी, हरियाली से ढके जंगल, बादलों के बीच गूंजती झरनों की आवाज और चट्टानों पर बहती जलधाराएं किसी का भी मन मोह लेती हैं। लेकिन यही खूबसूरती बरसात के दिनों में सबसे बड़ा खतरा भी बन जाती है। तेज बारिश के कारण जलप्रपातों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। शांत दिखाई देने वाली जलधारा कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले सकती है। ऊपर के क्षेत्रों में हुई बारिश का पानी कब नीचे आ जाए, इसका अनुमान लगाना लगभग असंभव होता है। पानी के भीतर छिपी गहरी खाइयां, धारदार चट्टानें, तेज बहाव और फिसलन किसी भी छोटी-सी चूक को बड़े हादसे में बदल सकती है।

बरसात के मौसम में देवपहरी, परसखोला, केंदई, फुटहामुड़ा, सतरेंगा, नकिया सहित जिले के अनेक पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ पहुंचते हैं। कई लोग सेल्फी लेने, वीडियो बनाने या झरनों के बिल्कुल पास जाकर नहाने की कोशिश करते हैं। यही लापरवाही कई बार जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।

जिले में बीते वर्षों में ऐसे कई दर्दनाक हादसे सामने आए हैं, जिनमें छात्र, युवा और पर्यटक पानी में बह गए या चट्टानों के बीच फंस गए। कई परिवारों ने अपने घर का इकलौता बेटा खोया, तो कई माता-पिता की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट गईं। इन घटनाओं से सबसे बड़ी सीख यही मिलती है कि प्रकृति का आनंद लें, लेकिन उसकी शक्ति को कभी चुनौती न दें।
बारिश के दौरान चट्टानों पर काई जम जाती है। ऊपर से मजबूत दिखाई देने वाले पत्थर बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं। कई स्थानों पर पानी के नीचे गड्ढे, सुरंगनुमा चट्टानें और तेज धाराएं होती हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देतीं। एक बार पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर स्वयं को संभालना बेहद कठिन हो जाता है।

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