
कोरबा भारी बारिश और लगातार खराब मौसम ने एसईसीएल के उत्पादन अभियान को बड़ा झटका दिया है। अगस्त में कंपनी 11.26 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले महज 9.90 मिलियन टन कोयला ही निकाल सकी। यानी एसईसीएल निर्धारित लक्ष्य से 1.36 मिलियन टन पीछे रह गई। कोरबा की कोयला अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली गेवरा, कुसमुंडा और दीपका मेगा परियोजनाएं भी अपने लक्ष्य से पिछड़ गईं। इनमें कुसमुंडा का प्रदर्शन सबसे कमजोर रहा, जबकि दीपका ने लक्ष्य के करीब पहुंचकर बेहतर प्रदर्शन किया।
अगस्त में कुसमुंडा को 2.25 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन परियोजना 1.41 मिलियन टन ही उत्पादन कर सकी। लक्ष्य की तुलना में 84 हजार टन की कमी रही और परियोजना महज 62.7 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर पाई। एसईसीएल की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल गेवरा को अगस्त में 3.42 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य मिला था। इसके मुकाबले 2.78 मिलियन टन उत्पादन हुआ। परियोजना 64 हजार टन लक्ष्य से पीछे रही और करीब 81.3 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। दीपका ने तीनों मेगा परियोजनाओं में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। 2.31 मिलियन टन के लक्ष्य के मुकाबले परियोजना ने 2.08 मिलियन टन उत्पादन किया। यानी लक्ष्य से सिर्फ 23 हजार टन की कमी रही और परियोजना ने करीब 90 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया।
सालाना लक्ष्य भी दबाव में, 7.47 मिलियन टन की पिछड़त
वित्तीय वर्ष 2026-27 में एसईसीएल ने 195 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। अगस्त तक कंपनी को 72.93 मिलियन टन उत्पादन कर लेना चाहिए था, लेकिन वास्तविक उत्पादन 65.46 मिलियन टन ही रहा। यानी कंपनी संचयी लक्ष्य से 7.47 मिलियन टन पीछे चल रही है।
अब सितंबर में भरपाई की चुनौती
सितंबर में भी बारिश पूरी तरह थमने के आसार नहीं हैं। ऐसे में एसईसीएल के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ खदानों में जलभराव, परिवहन मार्गों की खराब स्थिति और कोयला डिस्पैच जैसी चुनौतियों से निपटना बड़ी चुनौती होगी। सालाना लक्ष्य की दूरी कम करने के लिए आने वाले महीनों में उत्पादन की रफ्तार बढ़ानी होगी। ऐसे में कोरबा की तीनों मेगा परियोजनाओं के प्रदर्शन पर एसईसीएल की निगाहें टिकी रहेंगी।





