
रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में इन दिनों नेताओं की वापसी और संगठन को लेकर सियासी हलचल तेज है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी की पार्टी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस जोगी (जेसीसीजे) के कांग्रेस में विलय की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। रेणु जोगी और अमित जोगी की ओर से कांग्रेस में पार्टी के विलय के लिए आवेदन पहले ही दिया जा चुका है, लेकिन इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के दौरान बगावत करने वाले नेताओं की घर वापसी की प्रक्रिया भी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 36 नेताओं से जुड़े मामलों पर पार्टी की अनुशासन समिति में चर्चा हुई है। कुछ मामलों में वापसी का रास्ता साफ किया गया है, जबकि जोगी परिवार से जुड़े प्रकरण अभी लंबित हैं।
27 सितंबर पर टिकी निगाहें
अब सबसे ज्यादा नजर 27 सितंबर पर है। कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रभारी सुखदेव भगत अपने पहले रायपुर दौरे पर पहुंचेंगे। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसी बैठक में जेसीसीजे के कांग्रेस में विलय के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू भी स्पष्ट कर चुके हैं कि जोगी कांग्रेस का मामला सामान्य सदस्यता या वापसी का नहीं, बल्कि पार्टी के विलय से जुड़ा है। इसलिए प्रदेश प्रभारी और शीर्ष नेतृत्व से विचार-विमर्श के बाद ही इस पर फैसला होगा।
भूपेश बघेल की भूमिका को लेकर भी चर्चा
जेसीसीजे के संभावित विलय के साथ कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। जागरण की रिपोर्ट में राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि संगठन के भीतर एक धड़ा जोगी कांग्रेस की वापसी के पक्ष में बताया जा रहा है और इस घटनाक्रम को भूपेश बघेल की पार्टी के भीतर स्थिति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, यह राजनीतिक विश्लेषण है और कांग्रेस की ओर से इस आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
अमित जोगी वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। वहीं पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह ने भी कांग्रेस में वापसी के लिए आवेदन दिया है। ऐसे में नेताओं की वापसी और जेसीसीजे के संभावित विलय ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक बदलाव की चर्चाओं को बढ़ा दिया है।
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2016 में कांग्रेस से अलग हुई थी जोगी कांग्रेस
अजीत जोगी ने वर्ष 2016 में कांग्रेस से अलग होकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का गठन किया था। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में जेसीसीजे ने बसपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा और उसके पांच विधायक निर्वाचित हुए थे। अब करीब एक दशक बाद उसी राजनीतिक धारा के कांग्रेस में वापस आने की संभावना चर्चा में है।फिलहाल विलय पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। 27 सितंबर को सुखदेव भगत के रायपुर दौरे के दौरान होने वाली बैठक के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जोगी कांग्रेस का कांग्रेस में औपचारिक विलय होगा या प्रस्ताव अभी और विचार के लिए लंबित रहेगा ।





