बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई होनी है, लेकिन इससे पहले जिस तरह से घटनाक्रम बदला है, उसने एक बार फिर के पक्ष को मजबूत करने का काम किया है। लंबे समय से विवादों में रहे इस मामले में अमित जोगी ने लोवर कोर्ट से जमानत हासिल कर ली है, जो यह संकेत देता है कि उनके खिलाफ ठोस और निर्णायक सबूतों की कमी रही है।दरअसल, शुरुआत से ही इस केस को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।
जांच एजेंसियों की दिशा, गवाहों के बयान और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जाता रहा है कि मामला पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रहा। ऐसे में अमित जोगी का बार-बार कानूनी राहत पाना इस बात की ओर इशारा करता है कि उन्हें फंसाने की कोशिश भी हो सकती है।गौरतलब है कि साल 2007 में भी कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। इसके बावजूद केस का लंबा खिंचना और बार-बार अदालतों में जाना, कई लोगों के अनुसार, राजनीतिक दबाव और पुरानी रंजिशों का परिणाम माना जाता है।आज जब हाईकोर्ट में अंतिम सुनवाई हो रही है, तो पूरे प्रदेश की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बार न्याय पूरी तरह तथ्यों और निष्पक्षता के आधार पर होगा, जिससे सच्चाई सामने आएगी।कई जानकारों का मानना है कि यदि अदालत में ठोस प्रमाण पेश नहीं हो पाते हैं, तो यह मामला हमेशा के लिए खत्म हो सकता है और अमित जोगी को पूरी तरह से राहत मिल सकती है।अब देखना होगा कि आज की सुनवाई इस 23 साल पुराने केस को किस दिशा में ले जाती है—लेकिन फिलहाल हालात यह संकेत दे रहे हैं कि सच धीरे-धीरे सामने आ रहा है।
