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NTPC पर पर्यावरण विभाग की बड़ी कार्रवाई, 90 लाख की क्षतिपूर्ति

रात के अंधेरे में राखड़ की आड़ में सरकारी जमीन हथियाने का कही खेल तो नहीं? एक गाड़ी निकलती है, रिकॉर्ड में पांच गाड़ियां दर्शाई जा रही ! 

छुरीखुर्द में अवैध फ्लाई ऐश डम्पिंग पकड़ी गई, धनरास राखड़ बांध से शासकीय भूमि तक पहुंच रही थी राखड़—परिवहन रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में 

कोरबा :  औद्योगिक नगरी कोरबा में फ्लाई ऐश के अवैध निपटान को लेकर पर्यावरण विभाग ने देर रात बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की टीम ने जिला पर्यावरण अधिकारी प्रसन्ना सोनकर के नेतृत्व में ग्राम छुरीखुर्द स्थित अवैध फ्लाई ऐश डम्पिंग स्थल पर दबिश दी। मौके पर राखड़ डम्पिंग में लगे वाहनों को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि वाहनों में NTPC जमनीपाली के धनरास राखड़ बांध से फ्लाई ऐश लोड कर शासकीय भूमि पर अवैध रूप से डम्प की जा रही थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पर्यावरण विभाग ने NTPC लिमिटेड, जमनीपाली पर 90 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है। विभाग की इस कार्रवाई ने फ्लाई ऐश के परिवहन, डम्पिंग और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रात के अंधेरे में राखड़ की आड़ में सरकारी जमीन हथियाने का खेल?

छुरीखुर्द में रात के समय शासकीय भूमि पर राखड़ डम्प किए जाने की घटना ने सिर्फ पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का सवाल नहीं उठाया है, बल्कि इससे यह आशंका भी सामने आ रही है कि कहीं राखड़ की आड़ में सरकारी जमीनों को समतल कर कब्जे के लिए तैयार तो नहीं किया जा रहा।

सूत्रों के अनुसार जिले में कुछ स्थानों पर सरकारी जमीनों पर राखड़ पाटे जाने की शिकायतें पूर्व में भी सामने आती रही हैं। आरोप यह भी है कि राखड़ डालकर जमीन को समतल करने के बाद कुछ जगहों पर भूमि के उपयोग और कब्जे को लेकर विवाद सामने आए। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में राजस्व विभाग के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होगी कि पिछले कुछ वर्षों में किन-किन शासकीय जमीनों पर बड़ी मात्रा में फ्लाई ऐश डम्प की गई, डम्पिंग से पहले जमीन की स्थिति क्या थी और बाद में उसके उपयोग या स्वामित्व में कोई बदलाव हुआ या नहीं

एक गाड़ी निकलती है, रिकॉर्ड में पांच गाड़ियां?

फ्लाई ऐश परिवहन व्यवस्था को लेकर इससे भी गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वास्तव में एक गाड़ी राखड़ लेकर NTPC परिसर अथवा राखड़ बांध से बाहर निकलती है, जबकि रिकॉर्ड में पांच गाड़ियों के राखड़ लेकर निकलने की एंट्री दर्शाए जाने की आशंका है।

यदि ऐसा हो रहा है तो वास्तविक परिवहन और दस्तावेजों में दर्ज परिवहन के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। इस कथित व्यवस्था के जरिए परिवहन की मात्रा और भुगतान में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित ट्रांसपोर्टरों को लाखों रुपये का अनुचित लाभ पहुंचने का मामला सामने आ सकता है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए गेट पास, वजन पर्ची, वाहन प्रवेश-निकास रिकॉर्ड, जीपीएस डेटा, सीसीटीवी फुटेज, ट्रिप शीट और परिवहन बिलों का मिलान बेहद जरूरी है।

NTPC के संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल

यदि एक वाहन के वास्तविक रूप से निकलने के बावजूद रिकॉर्ड में कई वाहनों की आवाजाही दर्ज की गई है, तो यह भी जांच का विषय है कि ऐसे रिकॉर्ड तैयार और सत्यापित कैसे हुए। राखड़ के परिवहन और निकासी की निगरानी में लगे संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। यह स्पष्ट होना चाहिए कि वाहनों की एंट्री किस स्तर पर दर्ज होती है, वजन किस स्तर पर सत्यापित किया जाता है और ट्रांसपोर्टरों के बिलों का भुगतान किन दस्तावेजों के आधार पर किया जाता है। यदि रिकॉर्ड में अंतर मिलता है तो जिम्मेदारी तय करने के लिए पूरी प्रक्रिया की जांच आवश्यक होगी।

90 लाख की कार्रवाई के बाद बढ़ी उम्मीद

पर्यावरण विभाग द्वारा NTPC जमनीपाली पर 90 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने से यह संदेश जरूर गया है कि अवैध फ्लाई ऐश डम्पिंग को अब गंभीरता से लिया जा रहा है। जिला पर्यावरण अधिकारी प्रसन्न सोनकर ने बताया कि अवैध फ्लाई ऐश डम्पिंग के खिलाफ विभाग की रात्रिकालीन गश्त लगातार जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन सवाल सिर्फ छुरीखुर्द में पकड़ी गई डम्पिंग तक सीमित नहीं है। यदि जिले में लंबे समय से शासकीय जमीनों पर अवैध रूप से राखड़ डम्प की जाती रही है, तो ऐसे सभी स्थलों की पहचान कर उनका राजस्व और पर्यावरणीय रिकॉर्ड जांचना जरूरी होगा।

राखड़ की हर ट्रिप का हिसाब सामने आना जरूरी

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि NTPC से निकलने वाली राखड़ वास्तव में कितनी मात्रा में बाहर जा रही है और दस्तावेजों में कितनी मात्रा दर्ज हो रही है। एक वाहन के वास्तविक परिवहन और रिकॉर्ड में दर्शाई गई कई गाड़ियों की एंट्री के आरोपों की जांच यदि निष्पक्ष तरीके से होती है, तो पूरी व्यवस्था की तस्वीर सामने आ सकती है।

इसके लिए राखड़ बांध से लेकर अंतिम डम्पिंग स्थल तक प्रत्येक ट्रिप का रिकॉर्ड मिलाना होगा। किस वाहन ने कब प्रवेश किया, कितना वजन लेकर निकला, किस स्थान पर पहुंचा और उसके नाम पर कितना भुगतान हुआ—इन सभी बिंदुओं की जांच से कथित गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। छुरीखुर्द में पर्यावरण विभाग की कार्रवाई ने राखड़ के अवैध डम्पिंग पर लगाम कसने की दिशा में बड़ा कदम जरूर उठाया है, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि जांच केवल 90 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति तक सीमित न रहे। राखड़ के परिवहन, रिकॉर्ड, भुगतान, डम्पिंग स्थलों और सरकारी जमीनों की स्थिति की व्यापक जांच हो, ताकि यह साफ हो सके कि मामला महज अवैध डम्पिंग का है या इसके पीछे सरकारी जमीन और राखड़ परिवहन से जुड़ा कोई बड़ा खेल भी चल रहा है।

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