
पाटन चुनाव याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की अर्जी पर दखल से किया इनकार, अब हाईकोर्ट में तय होगी प्रारंभिक आपत्तिनई दिल्ली/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका के मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें भाजपा नेता विजय बघेल द्वारा दायर चुनाव याचिका की प्रारंभिक स्तर पर सुनवाई को चुनौती दी गई थी। मामला 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने से जुड़ा है। भाजपा नेता विजय बघेल ने चुनाव याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि मतदान से पहले लागू 48 घंटे की साइलेंस अवधि के दौरान चुनाव प्रचार संबंधी गतिविधियां की गईं। उन्होंने इसी आधार पर भूपेश बघेल के निर्वाचन को निरस्त करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहासोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि मौजूदा स्तर पर हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता। याचिका दाखिल करने की समयसीमा और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर हाईकोर्ट कानून के अनुसार विचार कर सकता है। अदालत के मुताबिक इन पहलुओं का निर्धारण रिकॉर्ड, गवाही और साक्ष्यों के आधार पर किया जाना जरूरी है। भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने दलील दी कि चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिका दाखिल करने की समयसीमा से संबंधित आपत्ति और हलफनामे की तारीख को लेकर भी तर्क रखे गए।हाईकोर्ट में जारी रहेगी कार्यवाहीइस मामले में पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो चुकी है। जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका की विचारणीयता से जुड़ी आपत्तियां उठाने की छूट दी थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जून 2026 में भी चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इनकार कर दिया था। अब मामले में चुनाव याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी। हाईकोर्ट में साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर संबंधित कानूनी आपत्तियों पर निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मामले की कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया है।





