सीपत में 300 मवेशी दलदल में फंसे, 30 से अधिक की मौत; गो सेवा आयोग कराएगा FIR

सीपत में 300 मवेशी दलदल में फंसे, 30 से अधिक की मौत; गो सेवा आयोग कराएगा FIRबिलासपुर। जिले के सीपत तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत झलमला में बनाए गए अस्थायी गोठान में बड़ी संख्या में मवेशियों की मौत का मामला सामने आया है। यहां करीब 300 से अधिक मवेशियों को रखा गया था। लगातार बारिश के कारण गोठान का पूरा परिसर दलदल में तब्दील हो गया, जिसके चलते मवेशियों के फंसने और मौत की सूचना है।नईदुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, बीते दो दिनों में मवेशियों की मौत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सरपंच ने 14 मवेशियों की मौत की बात कही है, जबकि ग्रामीणों का दावा है कि मृत मवेशियों की संख्या 30 से अधिक है। ग्रामीणों के मुताबिक शनिवार को 23 और रविवार को आठ मवेशियों की मौत हुई।बारिश से दलदल में बदला गोठानबताया गया है कि फसलों को मवेशियों से बचाने के लिए करीब दो महीने पहले खुले मैदान में तार फेंसिंग कर अस्थायी गोठान बनाया गया था। इसके बाद आसपास के क्षेत्रों से मवेशियों को यहां रखा जाने लगा। लगातार बारिश के बाद परिसर में गहरा कीचड़ और दलदल हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि मवेशियों के लिए पर्याप्त शेड, चारा और पानी की व्यवस्था नहीं थी।शवों को दफनाने और नाले में बहाने का आरोपमामले में ग्रामीणों ने मृत मवेशियों की संख्या छिपाने के लिए कुछ शवों को मशीन से गड्ढा खोदकर दफनाने और कुछ शवों को नाले में बहाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं सरपंच धनलाल साहू ने इन आरोपों से अलग 14 मवेशियों की मौत की बात कही है। उन्होंने मौत का कारण बारिश और बीमारी बताया तथा कहा कि संक्रमण और दुर्गंध फैलने से रोकने के लिए शवों को दफनाया गया।गो सेवा आयोग ने जांच और FIR की बात कहीछत्तीसगढ़ राज्य गो सेवा आयोग के जिला अध्यक्ष धीरेंद्र दुबे ने मामले को गंभीर बताते हुए पशु चिकित्सा विभाग की टीम भेजकर जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद शासन के संज्ञान में मामला लाकर पशु अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कराया जाएगा और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और मवेशियों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बिलासपुर जिले के मस्तूरी क्षेत्र में पहले भी जलभराव और दलदल के कारण मवेशियों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

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