
नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने निर्वाचन आयोग की संरचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। पटना के चाणक्य विधि विश्वविद्यालय में ‘राजेंद्र प्रसाद मेमोरियल लेक्चर’ देते हुए उन्होंने आयोग को परोक्ष रूप से चेतावनी दी और कहा कि यदि चुनाव कराने वाली संस्थाएं चुनाव लड़ने वालों पर ही निर्भर होंगी, तो मतदान की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने निर्वाचन आयोग को एक उच्च महत्व वाला संवैधानिक प्राधिकरण बताते हुए कहा कि चुनाव केवल एक सामयिक घटना नहीं, बल्कि राजनीतिक सत्ता के गठन का आधार हैं। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया पर नियंत्रण का अर्थ वास्तव में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की स्थितियों पर नियंत्रण करना है।
दी चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव कराने वाले लोग सत्ता पक्ष या उम्मीदवारों पर निर्भर हैं, तो पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित होती है। संस्थागत स्वतंत्रता और सत्ता पर अंकुश न्यायमूर्ति ने अपने संबोधन में ‘फोर्थ-ब्रांच इंस्टीट्यूशंस’ (चौथे स्तंभ की संस्थाओं) के महत्व पर जोर दिया।
