
कोरबा-पोड़ी-उपरोड़ा :- जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर हो रहे इस तरह के खेल से न सिर्फ सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा है, बल्कि ग्रामीणों का भरोसा भी टूट रहा है। जिस खबर की हम बात कर रहे है । उस खबर को कुछ साल पहले हमारे न्यूज़ ने प्राथमिकता से सामने लाने का प्रयास किया था । जिसमे बड़े बड़े अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई थी ।
दरअसल, पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत बंजारी में सोलर स्ट्रीट लाइट व हाईमास्ट लाइट (126+9=135 नग) लगाने के नाम पर एक करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ है। इतना पैसा खर्च होने के बावजूद मौके पर कोई कार्य नजर नहीं आता, जिससे पूरा मामला फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है।

सूत्र से मिली जानकारी के मुताबिक 30 जुलाई 2022 को 90,38,400 रुपए का भुगतान किया गया। इसके बाद 16 सितंबर 2022 को 16,94,700रुपए और 15 अक्टूबर 2022 को 5,64,900 रुपए की तीसरी किश्त की राशि भी जारी कर दी गई। हैरानी की बात यह है कि तीन किश्तों में भुगतान तो पूरा हो गया लेकिन काम शून्य है।
यह बताना लजमीय होगा कि जिस स्ट्रीट लाइट के लिए सोलर पैनल की खरीदी हुई थी इस प्रोजेक्ट के लिए कोई निविदा नही निकली गई थी । बल्कि अपने चहेते ठेकेदार को फौरी तौर पर काम दिया गया था । जिसका दस्तावेज हमारे पास था । इस मामले में बड़े बड़े अधिकारियों के हाथ होने की जानकारी मिली थी । इतने बड़े पैमाने पर किया गया भ्रष्टाचार के लिए कोई जांच अधिकारी भी तैनात नही किये गए थे ।
इसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से निकली जा चुकी है जिसमे ऐसा कोई काम नही दिए जाने की जानकारी हुई थी । ऐसे में ठेकेदार को किस विभाग के द्वारा भुकतान किया गया । और किस अधिकारी के द्वारा ठेकेदार का साथ दिया गया है इसकी भी जांच होनी चाहिये। ।
आरोप है कि ओरी ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर चेक के जरिए भुगतान कर दिया गया, लेकिन सोलर स्ट्रीट लाइट का काम केवल कागजों में ही सीमित रहा। ग्रामीणों को आज भी अंधेरे में रहने मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि फाइलों में विकास पूरा दिखाया जा रहा है।
जांच और एफआईआर की मांग
युकां नेता मधुसूदन दास ने इस सम्बंध में कई स्तरों पर लिखे पत्र में मांग की है कि इस पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और शासन के पैसे के दुरुपयोग को देखते हुए अपराध पंजीबद्ध किया जाए।
सवालों के घेरे में पंचायत व्यवस्था
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं लग रहा, बल्कि यह बताता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में किस तरह से कागजी खेल खेला जा रहा है। सवाल उठता है कि आखिर बिना भौतिक सत्यापन के इतनी बड़ी रकम कैसे जारी कर दी गई?
अब तक इस मामले में जनपद पंचायत,जिला पंचायत,जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे लोगों में सवालिया आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब देखना है कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है? कार्रवाई होगी या फिर फाईलों में एक और घोटाला दफन हो जाएगा? इस विषय में जनपद सीईओ से जानकारी लेने के लिए फोन करने पर उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
