
कोरबा। एसईसीएल की मानिकपुर खुली खदान के विस्तार को लेकर कोरबा में सियासत तेज हो गई है। 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले उद्योग मंत्री एवं कोरबा विधायक लखन लाल देवांगन और पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल आमने-सामने नजर आ रहे हैं।उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने एसईसीएल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों के लंबित मुआवजा, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना से जुड़े मामलों का उचित निराकरण होने और काचांदी नाला डायवर्सन की प्रारंभिक निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद ही जनसुनवाई आयोजित की जाए। इसके चलते 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई को आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने तक स्थगित अथवा आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
मानिकपुर ओपन कास्ट एक्सटेंशन परियोजना के तहत खदान की उत्पादन क्षमता 5.25 एमटीपीए से बढ़ाकर 7.0 एमटीपीए करने का प्रस्ताव है। परियोजना से जुड़े भिलाईखुर्द गांव में मार्च 2026 में किए गए सर्वे के मुआवजा प्रकरण और R&R से संबंधित कार्य अभी अंतिम चरण में बताए जा रहे हैं। वहीं कुदरी गांव के पास काचांदी नाला डायवर्सन को लेकर जल संसाधन विभाग की स्थल निरीक्षण एवं प्रारंभिक रिपोर्ट भी लंबित है।इधर, पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर एसईसीएल प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उनकी जमीन का अर्जन वर्ष 1964 में बेहद कम मुआवजे पर किया गया था और छह दशक से अधिक समय बीतने के बावजूद कई परिवार मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार जैसी मांगों के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैंl
ग्रामीणों ने पूर्व मंत्री से मुलाकात कर कहा कि जमीन जाने के बाद खेती का सहारा खत्म हो गया, लेकिन स्थायी पुनर्वास और रोजगार की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो सकी। उन्होंने मांग की कि पुराने प्रभावित परिवारों के लंबित मामलों का समाधान होने तक खदान विस्तार की पर्यावरणीय जनसुनवाई नहीं कराई जाए।जय सिंह अग्रवाल ने इस संबंध में एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को पत्र भेजकर प्रस्तावित जनसुनवाई तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान करने के बाद ही परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही।
पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मामलों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराई जाती है तो ग्रामीण इसका जोरदार विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।
मानिकपुर खदान विस्तार का मामला अब केवल परियोजना विस्तार तक सीमित नहीं रह गया है। छह दशक पुराने विस्थापन और अधिकारों के मुद्दे के बीच 21 अगस्त की प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन, प्रभावित ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।





