
कोरबा। महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे हैं। भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार झूठा भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128वां संविधान संशोधन सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुका है। भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को क्यों लागू नहीं कर रही है? इस बिल के आधार पर तुरंत आरक्षण प्रभावी हो सकता है।
उक्त बातें जिला कांग्रेस प्रभारी व पूर्व विधायक डॉ रश्मि सिंह ने कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकारवार्ता के दौरान कही। श्रीमती सिंह ने कहा कि भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।
संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें थी। जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गयी थी। विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके। जब 2026-27 की जनगणना शुरू है तथा सरकार जाति जनगणना की भी बात कर चुकी है तो जनगणना के बाद आये नये आंकड़ों के आधार पर परिसीमन क्यों नहीं कराया जा रहा? महिला आरक्षण बिल को यदि तुरंत लागू करना है तो परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत का आरक्षण क्यों सरकार नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दल इसके लिए तैयार है। सरकार 2023 के महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन कर महिला आरक्षण को तुरंत लागू कर सकती थी उसने ऐसा क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि भाजपा की मंशा महिला आरक्षण की नहीं अपने मनमुताबिक सीटों के परिसीमन की थी, जो विपक्षी दलों की एकजुटता से पूरा नहीं हो चुका। सीटों के परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण को लेकर देश में भ्रम फैला रही है। प्रेस वार्ता में विधायक फूलसिंह राठिया, मुकेश राठौर, मनोज चौहान, श्याम सुंदर सोनी, राजकिशोर प्रसाद, कुसुम द्विवेदी, सपना चौहान, सुरेंद्र प्रताप जायसवाल सहित अन्य कांग्रेस नेता उपस्थित रहे।
कांग्रेस शुरु से महिला आरक्षण की पक्षधर
श्रीमती सिंह ने कहा कि पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिल रहा तो यह भी कांग्रेस की नीतियों से संभव हो पाया। सबसे पहले राजीव गांधी ने 1989 के मई महीने में पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश किया। वह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था लेकिन सितंबर 1989 में राज्यसभा में पास नहीं हो सका। अप्रैल 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने पंचायतों और नगर पालिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण के लिए संविधान संशोधन विधेयक को फिर से पेश किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। महिलाओं के लिए संसद और राज्यों की विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह संविधान संशोधन विधेयक लाए। विधेयक 9 मार्च 2010 को राज्यसभा में पारित हुआ। कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं।
