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जिला पंचायत में हंगामा: CEO दिनेश कुमार नाग पर मनमानी और कमीशनखोरी के आरोप, अध्यक्ष पवन सिंह धरने पर बैठे

जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग की कार्यप्रणाली और डीएमएफ फंड के उपयोग को लेकर सोमवार को जिला पंचायत परिसर में जमकर हंगामा देखने को मिला। भाजपा समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह समेत कई जिला पंचायत सदस्य और उनके पति जिला पंचायत कार्यालय परिसर में धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान सदस्यों के पतियों की सक्रिय मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।

धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ दिनेश कुमार नाग पर मनमानी, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कथित कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए। जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि सीईओ की कार्यप्रणाली को लेकर उनके पास रिकॉर्डिंग तक मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों को कोई तवज्जो नहीं दी जा रही।

पवन सिंह ने कहा, “20-25 साल के कार्यकाल में मैंने 16 सीईओ देखे हैं, लेकिन इनके जैसा व्यवहार कभी नहीं देखा। सामान्य सभा को दरकिनार कर मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो 10 जून को जिला पंचायत में ताला लगाया जाएगा।”

तीन घंटे इंतजार, फिर भी बैठक में नहीं पहुंचे सीईओ

जिला पंचायत अध्यक्ष ने बताया कि निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं को लेकर सभी जनपद सदस्यों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सीईओ दिनेश कुमार नाग को भी आमंत्रित किया गया था। आरोप है कि करीब तीन घंटे इंतजार के बावजूद सीईओ बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे जनप्रतिनिधियों का गुस्सा भड़क गया और वे धरने पर बैठ गए।

धरने के दौरान जब सीईओ अपने चेंबर से निकलकर जाने लगे तो सदस्यों ने उन्हें रोककर चर्चा करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने “अभी टाइम नहीं है” कहकर वहां से निकल जाना बताया जा रहा है। इसके बाद नाराज सदस्यों ने जिला पंचायत परिसर में जमकर नारेबाजी की।

डीएमएफ फंड में पारदर्शिता नहीं होने का आरोप

धरने पर बैठे जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि डीएमएफ फंड से होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। सदस्यों का कहना है कि योजनाओं के चयन और स्वीकृति प्रक्रिया में निर्वाचित प्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है और प्रशासनिक स्तर पर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं।

कई सदस्यों ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में कथित कमीशनखोरी का खेल चल रहा है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जाएगी तो लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्व खत्म हो जाएगा।

धरने और नारेबाजी के कारण जिला पंचायत परिसर में लंबे समय तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। भाजपा समर्थित सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा

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