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KORBA:सात दिवसीय योग ध्यान शिविर का हुआ भव्य समापन, योग अपनाने का लिया संकल्प

कोरबा,। सीएसपीजीसीएल कोरबा पूर्व स्थित सीनियर क्लब परिसर में 11 मई से 17 मई 2026 तक आयोजित सात दिवसीीय निःशुल्क योग ध्यान शिविर का रविवार सुबह भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रतिदिन प्रातः 5:30 बजे से 7:30 बजे तक आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में योगाभ्यर्थियों ने सहभागिता कर योग, ध्यान एवं प्राणायाम का लाभ प्राप्त किया। शिविर का संचालन योगाचार्य डॉ. डी.के. आनंद द्वारा किया गया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.एन. केसरी उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्य अभियंता संजीव कंसल एवं अतिरिक्त मुख्य अभियंता सुनील कुमार सरना शामिल हुए। अतिथियों का स्वागत महिला प्रेरणा मंडल की सचिव श्रीमती अनु सरना एवं श्रीमती मालती जोशी ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया।

शिविर के दौरान योगाचार्य डॉ. डी.के. आनंद ने योगासन, प्राणायाम, ध्यान, सूक्ष्म व्यायाम, प्राकृतिक चिकित्सा, एक्यूप्रेशर एवं स्वस्थ जीवनशैली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एवं प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक प्रक्रिया है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति तनावमुक्त रहता है तथा मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

मुख्य अतिथि डॉ. एस.एन. केसरी ने अपने संबोधन में कहा कि योग जीवन का आधार है और महर्षि पतंजलि द्वारा प्रदत्त अष्टांग योग आज पूरे विश्व में लोगों को स्वस्थ जीवन की दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग एवं ध्यान अत्यंत आवश्यक हो गया है। योग के माध्यम से शारीरिक रोगों के साथ-साथ मानसिक तनाव, चिंता एवं अवसाद जैसी समस्याओं से भी राहत मिलती है। उन्होंने डॉ. डी.के. आनंद द्वारा पिछले 20 वर्षों से कोरबा में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

विशिष्ट अतिथि संजीव कंसल ने कहा कि योग से शरीर स्वस्थ, मन शांत एवं आत्मा ऊर्जावान रहती है। ध्यान एवं प्राणायाम से एकाग्रता और कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। उन्होंने लोगों से प्रतिदिन कम से कम एक घंटा योग एवं ध्यान के लिए निकालने की अपील की। वहीं सुनील कुमार सरना ने कहा कि योग हमारी वैदिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है, जिससे व्यक्ति शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है।

योगाचार्य डॉ. डी.के. आनंद ने कहा कि योग भारत की प्राचीन संस्कृति एवं ऋषि-मुनियों की अमूल्य देन है। यदि प्रत्येक व्यक्ति योग, प्राणायाम एवं ध्यान को अपने दैनिक जीवन में शामिल करे तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है और स्वस्थ एवं आनंदमय जीवन जिया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी योगाभ्यर्थियों ने नियमित रूप से योग एवं ध्यान को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा योगाचार्य डॉ. डी.के. आनंद को शॉल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। अंत में उपस्थित अतिथियों, योगाभ्यर्थियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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