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तिलकेजा पंचायत में पंचायती राज के नियमों की उड़ी धज्जियाँ, पंचायत सचिव नविता दुबे और सरपंच तेरस कंवर ने भारत सरकार से आए विकास कोष को पंचो के खाते मे कराया आहरण

कलेक्टर जनदर्शन की जाँच में फूटा पाप का घड़ा? तिलकेजा में सचिव नविता दुबे की सवेछाँचारिता का पर्दाफाश l

ग्राम पंचायत तिलकेजा से पंचायती राज व्यवस्था को शर्मसार करने वाली भ्रष्टाचार की एक मुकम्मल तस्वीर सामने आई है। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 15वें वित्त आयोग और समग्र शिक्षा विभाग की शासकीय राशि का खुलेआम बंदरबांट के आरोप सामने आ रहा है।
इस पूरे वित्तीय कुचक्र में ग्राम सचिव नविता दुबे, सरपंच तेरस बाई कँवर और उनके पति देवमूरत कंवर की तिकड़ी सीधे तौर पर कटघरे में खड़ी हो गई है। आरोप है कि शासकीय धन के लोभ में इन तीनों ने न केवल अपने दायित्वों की बलि दे दी बल्कि पूरे तंत्र की आंखों में धूल झोंककर सरकारी खजाने में सेंध लगाई है।

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने मामले की लिखित शिकायत कोरबा कलेक्टर के जनदर्शन कार्यक्रम में दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन DM ने त्वरित जाँच टीम गठित कर दी ।

जाँच की जिम्मेदारी चतुरानंद कंवर करारोपण अधिकारी और रामकुमार पैकरा वरिष्ठ करारोपण अधिकारी को सौपी गई है, हालांकि अंतिम विस्तृत रिपोर्ट आना अभी बाकी है, लेकिन प्राथमिक जाँच में यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि वित्तीय नियमों के विपरीत सीधे निजी खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया है।

कर्तव्य को ताक पर रख लाभ के जाल में फंसीं सचिव नविता दुबे जी हाँ इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना भूमिका ग्राम पंचायत सचिव नविता दुबे की रही है। सचिव कोई आम जनप्रतिनिधि नहीं है,बल्कि शासन द्वारा नियुक्त एक जिम्मेदार लोक सेवक होता है, जिसे नियमों का रखवाला माना जाता है।

नियमतः जब सरपंच या उनके पति द्वारा राशि को निजी खातों में डालने का दबाव बनाया जा रहा था, तब सचिव को अपने कर्तव्य और नैतिक आचरण का परिचय देते हुए इस पर पुरजोर आपत्ति दर्ज करनी चाहिए थी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया ।

वित्तीय नियमों की बारीक समझ होने के बावजूद सचिव ने आखिर क्यों अपनी आँखें बंद कर लीं? बिना सचिव के डिजिटल सिग्नेचर DSC और लॉगिन के एक रुपया भी इधर से उधर नहीं हो सकता। निजी खातों में धड़ल्ले से राशि का ट्रांसफर होना यह साफ बयां करता है कि शासकीय पैसे के लाभ के खेल में शुचिता को पूरी तरह भुला दिया गया।

संवैधानिक रूप से पंचायत की कमान सरपंच तेरस बाई कँवर के हाथों में है, लेकिन धरातल पर नियमों को बंधक बनाने का काम उनके पति देवमूरत कंवर पर करने के आरोप सामने आए हैं। हालांकि देवमूरत कंवर स्वयं पंच के पद पर आसीन हैं, लेकिन वे पंच की गरिमा और सीमा लांघकर सरपंच के हर एक कार्य में अपनी मुख्य सहभागिता निभाते रहे हैं।

पंचायती राज में सरपंच के अधिकारों का प्रयोग कोई दूसरा नहीं कर सकता लेकिन देवमूरत कंवर ने पंचायत को अपनी जागीर समझते हुए वित्तीय मामलों में मुख्य भूमिका निभाई और नियमों को मरोड़ने का काम किया। सरपंच तेरस बाई कँवर ने अपनी शक्तियों को पति के हाथों में सौंपकर और इस वित्तीय हेराफेरी पर मौन सहमति देकर अपने पद की गरिमा को धूमिल किया है। पंच जमुना देवी जायसवाल और ग्राम सभा अध्यक्ष अनुसूईया कंवर, उपसरपंच पद्मा कौशिक के खाते में 65100, और बिमला बाई पंच के खाते में 34000 हजार रुपये निजी खातों में वेंडर का पैसा ट्रांसफर होना बिना इनकी मिलीभगत के संभव ही नहीं था।

भारत सरकार का पैसा गांव के विकास के लिए या निजी तिजोरी भरने के लिए? एक बड़ा सवाल है 15वें वित्त आयोग और समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलने वाली यह राशि भारत सरकार द्वारा गांवों के बुनियादी ढांचे को सुधारने गरीब बच्चों के लिए स्कूल भवन चमकाने और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं देने के लिए भेजी जाती है। यह जनता के खून-पसीने की कमाई का टैक्स है। लेकिन तिलकजा पंचायत में इस राशि को वेंडरों के बजाय अपनों के निजी बैंक खातों में डालकर सीधे आहरित कर लिया गया। यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि गांव के विकास के हक पर सीधा डाका है।

क्या सबने मिलकर बंद कर ली थीं आंखें? नियम कहते हैं कि भुगतान केवल अधिकृत वेंडर को ऑनलाइन PFMS पोर्टल के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन यहाँ नियमों का गला घोंटकर व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता दी गई।
इस गंभीर वित्तीय कदाचार और घोर अनैतिकता को लेकर अब जिला प्रशासन कोरबा और जिला पंचायत सीईओ की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं। जाँच में गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद अब देखना यह होगा कि क्या भारत सरकार के इस पैसे का गबन करने वाली इस तिकड़ी पर कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई होगी या फिर जाँच की फाइलों में इस भ्रष्टाचार को भी दबा दिया जाएगा? बहरहाल शिकायतकर्ता और ग्रामीणों ने अब इस मामले में आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।

नियमों का कफ़न ओढ़कर बैठी इस भ्रष्ट तिकड़ी सचिव नविता, सरपंच तेरस और सरपंच पति देवमूरत ने तिलकेजा के विकास का गला घोंटा है। कलेक्टर जनदर्शन की जाँच में इस वित्तीय डकैती की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद अब देखना यह है कि प्रशासन इस तिकड़ी को सलाखों के पीछे भेजकर गरीबों के हक की वसूली करता है, या यह फाइल भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।

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