
कोरबा। बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में नगर निगम का विशेष सम्मिलन आयोजित हुआ, जिसमें सत्ता और विपक्ष दोनों दलों के पार्षद मौजूद रहे। महिला आरक्षण बिल को लेकर चर्चा में सत्ता और विपक्ष के बीच जमकर नोंक झोंक देखने को मिली। संसद में महिला आरक्षण बिल गिरने को लेकर सत्ता पक्ष ने कांग्रेस और विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताया, तो दूसरी ओर विपक्षी पार्षदों ने 2023 में पास बिल को लागू करने की बात कही। इस संबंध में सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने कहा कि नगर निगम में आज विशेष सम्मिलन बुलाया गया था। जिसमें दो प्रस्ताव पर चर्चा की गई। पहला प्रस्ताव महापौर द्वारा महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का था। दूसरा प्रस्ताव निर्दलीय पार्षद दल द्वारा लाया गया, जिसमें उन्होंने सभी सदनों में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण की मांग रखी। सभापति ने कहा कि दोनों प्रस्ताव पारित हुए। महापौर संजूदेवी राजपूत ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला विरोधी रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रहे हैं। इसमें हमेशा कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा रोड़ा अटकाने का काम किया जाता रहा है। चाहे वह तीन तलाक बिल का मामला ही क्यों ना हो। उन्होंने कहा कि आरक्षण बिल में नए परिसीमन से महिलाओं को और अधिक संख्या में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल जाए तो क्या हर्ज है। पार्षद और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर ने कहा कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है। राष्ट्रपति का अनुमोदन भी हो चुका है। उस बिल को लागू कर देना चाहिए। नए परिसीमन में सीट जोड़कर बिल पेश किया गया। क्या उन्होंने इसके लिए सर्वे और जनगणना कराया है। बुधवार को सदन में महिला आरक्षण बिल को लेकर गहमा गहमी रही।
