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34 साल में पहली बार 16 दिनों तक खुले रहे हसदेव बांगो बांध के गेट, पानी की आवक घटने पर तीन गेट बंद

कोरबा, हसदेव बांगो बांध के निर्माण के 34 साल के इतिहास में पहली बार लगातार 16 दिनों तक गेट खोलकर पानी छोड़ा गया। पानी की आवक कम होने के बाद रविवार को बांध के शेष तीन खुले गेट भी बंद कर दिए गए। फिलहाल बांध का जलस्तर 358.14 मीटर है और जलभराव करीब 91 प्रतिशत है। हालांकि, जलस्तर बढ़ने पर जरूरत के अनुसार दोबारा गेट खोले जा सकते हैं।

हसदेव बांगो बांध का निर्माण वर्ष 1992 में पूरा हुआ था। बांध की अधिकतम जलभराव क्षमता 359.66 मीटर है। जलस्तर 358 मीटर से अधिक होने पर अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए गेट खोले जाते हैं। इस वर्ष 15 अगस्त को जलस्तर तेजी से बढ़ने के बाद बांध के गेट खोलने पड़े थे। स्थिति ऐसी बनी कि 11 में से 10 गेट तक खोलने की नौबत आ गई थी।

शनिवार को दो गेट बंद किए जाने के बाद तीन गेट खुले रह गए थे। पानी की आवक में कमी आने के बाद रविवार को इन तीनों गेटों को भी बंद कर दिया गया। इस दौरान अधिकतम 42 हजार क्यूसेक पानी गेटों के माध्यम से हसदेव नदी में छोड़ा गया।

फिलहाल हसदेव बांगो का हाइडल पावर प्लांट पूरी क्षमता से संचालित हो रहा है। प्लांट से करीब 9 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। पानी की आवक के अनुसार इस मात्रा को घटाया-बढ़ाया जा रहा था।

बारिश का दौर जारी होने के कारण फिलहाल सिंचाई के लिए पानी की मांग नहीं है। इसके बावजूद नदी का जलस्तर सामान्य बनाए रखने के लिए नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं दर्री बैराज का जलस्तर निर्धारित 941 फीट बनाए रखने के लिए रोजाना गेट खोलने की स्थिति बन रही है। जलस्तर 941 फीट से अधिक होने पर बैराज के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी की निकासी की जाती है।

हसदेव बांगो परियोजना के कार्यपालन अभियंता एसके भारती ने बताया कि फिलहाल पानी की आवक कम होने के कारण गेट बंद किए गए हैं। यदि आने वाले दिनों में पानी की आवक बढ़ती है और जलस्तर निर्धारित सीमा से ऊपर जाता है तो स्थिति के अनुसार दोबारा गेट खोलने पर विचार किया जाएगा।

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