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नाबालिग बेटी को कार की चाबी देना पड़ा भारी, 3 मौतों के मामले में पिता को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से किया इनकार

बिलासपुर 9 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत के मामले में आरोपी बनाए गए एक पिता को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने नाबालिग बेटी को वाहन चलाने के लिए कार की चाबी देने के आरोप में दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने की मांग खारिज कर दी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट साक्ष्यों की जांच या मिनी ट्रायल नहीं कर सकता।

30 अक्टूबर 2025 को हुआ था दर्दनाक हादसा

मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के कापू रोड स्थित छाल मोड़ खमहार के पास हुए सड़क हादसे में कार की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में एक महिला और दो पुरुष शामिल थे।पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि दुर्घटना के समय कार घनश्याम महिलाने की नाबालिग बेटी चला रही थी। पुलिस का कहना है कि पिता को यह जानकारी थी कि उसकी बेटी वाहन चलाने की कानूनी उम्र में नहीं है, इसके बावजूद उसने उसे कार की चाबी देकर वाहन चलाने की अनुमति दी। इसी आधार पर पिता को भी सह-आरोपी बनाया गया।

सीसीटीवी और फॉरेंसिक रिपोर्ट का दिया हवाला

याचिकाकर्ता घनश्याम महिलाने ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा कि वह न तो वाहन का पंजीकृत मालिक है और न ही हादसे के समय कार चला रहा था। उनके अधिवक्ता ने घटना स्थल के पास एक रेस्टोरेंट में लगे सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि दुर्घटना के समय कार नाबालिग बेटी नहीं, बल्कि अभिषेक भास्कर नामक बालिग व्यक्ति चला रहा था, जबकि बेटी बगल की सीट पर बैठी थी।याचिका में यह भी कहा गया कि एक शासकीय कर्मचारी होने के कारण इस मामले का उनके करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, इसलिए उनके खिलाफ पूरी आपराधिक कार्रवाई निरस्त की जाए।

हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट में रखें अपना पक्ष

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत इस स्तर पर साक्ष्यों का परीक्षण या मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता।अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और फॉरेंसिक रिपोर्ट बचाव पक्ष के साक्ष्य हैं, जिनकी प्रमाणिकता और स्वीकार्यता का निर्णय ट्रायल कोर्ट में होगा।कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस की चार्जशीट में प्रथम दृष्टया यह आरोप मौजूद है कि पिता ने जानबूझकर नाबालिग बेटी को वाहन की चाबी सौंपी थी। इसलिए एफआईआर और चार्जशीट को इस चरण में निरस्त नहीं किया जा सकता।हालांकि, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि वह ट्रायल कोर्ट में अपने सभी साक्ष्य और दलीलें प्रस्तुत कर सकता है।

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