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कोरबा: नशा मुक्ति केंद्र में मरीज की मौत, परिजनों को नहीं दी सूचना – परिवार का हंगामा; पुलिस जांच शुरू

 छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के खरमोरा स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के दौरान एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना तब और गंभीर हो गई जब यह सामने आया कि केंद्र प्रबंधन ने मृतक के परिजनों को समय पर कोई सूचना नहीं दी और मामले को दबाने की कोशिश की। परिजनों को जब किसी अन्य स्रोत से खबर मिली, तो वे तत्काल केंद्र पहुंचे और जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला संज्ञान में ले लिया है और जांच शुरू कर दी गई है।

परिवार को नहीं बताया, खुद पहुंचे – आंखों में आंसू, होठों पर सवाल
वह शख्स नशे की गिरफ्त से बाहर निकलने की कोशिश में खरमोरा के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती था। परिवार को उम्मीद थी कि वह एक दिन ठीक होकर घर लौटेगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जब मौत हुई, तो केंद्र प्रबंधन ने परिजनों को सूचित करने के बजाय चुप्पी साध ली। परिवार को जब किसी दूसरे माध्यम से खबर लगी, तब वे दौड़े-दौड़े केंद्र पहुंचे। वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था – एक तरफ शोक में डूबे परिजन, दूसरी तरफ प्रबंधन की चुप्पी।

परिजनों ने भरे गले से कहा –
“हमें समय पर सूचना नहीं दी गई… अगर पहले बता देते तो शायद हम अपने आदमी को देख पाते… ये बहुत बड़ी लापरवाही है…”
यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है – यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो “उपचार” का दावा तो करती है, लेकिन जवाबदेही से मुंह फेर लेती है।

पुलिस पहुंची, शव पोस्टमार्टम को भेजा
हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को संज्ञान में लिया। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ताकि मौत के असली कारणों की पुष्टि हो सके।

पुलिस अब यह जांच करेगी कि-
– मृतक की मौत किन परिस्थितियों में हुई
– केंद्र में उसका इलाज किस तरह किया जा रहा था
– परिजनों को सूचित न करने के पीछे क्या मंशा थी
– क्या केंद्र में किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही बरती गई

सवालों के घेरे में नशा मुक्ति केंद्र
यह पहली बार नहीं है जब किसी नशा मुक्ति केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। ऐसे केंद्रों में भर्ती मरीज अक्सर अपने परिवार से कटे होते हैं और पूरी तरह नशा मुक्ति केंद्र प्रबंधन के भरोसे रहते हैं। ऐसे में पारदर्शिता और जवाबदेही की जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है।

खरमोरा की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जो संस्थाएं किसी की जिंदगी बचाने का दावा करती हैं, वे खुद कितनी जिम्मेदार हैं?

अब सबकी निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी हैं। अगर जांच में लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित केंद्र प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठना स्वाभाविक है। परिवार न्याय की उम्मीद लिए बैठा है – और यह शहर देख रहा है कि व्यवस्था उनकी उस उम्मीद को पूरा करती है या नहीं।

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