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पार्षद के नेतृत्व में किया गया चक्काजाम, लिखित आश्वासन पर चार घंटे बाद आंदोलन हुआ समाप्त

कोरबा। एसईसीएल के रेलवे साइडिंग से उठने वाले धूल के गुबार ने लोगों का सांस लेना दूभर कर दिया। वे लगातार प्रबंधन से प्रदूषण की रोकथाम के लिए मांग करते रहे, लेकिन उनकी मांगों की अनदेखी कर दी गई। आखिरकार विवश होकर पांच गांव के ग्रामीण सड़क पर उतर गए। उन्होंने मुख्यमार्ग में चक्काजाम कर दिया। मौके पर पहुंचे अफसरों ने दो दिवस के भीतर समस्या का समाधान करने आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर चार घंटे बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

दरअसल सुराकछार में एसईसीएल का भूमिगत कोयला खदान स्थित है। प्रबंधन द्वारा कोल परिवहन के लिए रेलवे साइडिंग बनाया गया है, जहां मालगाड़ी के अलावा भारी वाहनों में कोयला लोड कर अन्यत्र रवाना किया जाता है। रेलवे साइडिंग से उड़ने वाला कोल डस्ट के कारण वातावरण प्रदूषित होता है। क्षेत्र में कोल डस्ट के कारण होने वाली परेशानी से लोग त्रस्त हो चुके थे। नगर पालिक निगम वार्ड क्रमांक 65 के पार्षद प्रेम कुमार साहू ने 3 जून को कलेक्टर से भी समस्या से निजात दिलाने की मांग की थी। उन्होंने पुलिस व प्रशासन को लिखे पत्र में समस्या का निराकरण नही होने पर 15 जून को पंखादफाई मुख्यमार्ग में चक्काजाम की चेतावनी भी दी थी। बावजूद इसके किसी तरह की पहल नही हुई। लिहाजा सोमवार की सुबह करीब नौ बजे भैरोताल, प्रेमनगर सहित पांच गांव के ग्रामीण सड़क पर उतर गए। उन्होंने मुख्यमार्ग में चक्काजाम कर दिया, जिससे वाहनों के पहिए थम गए। यह खबर मिलते ही पुलिस व प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों को समझाईश दी, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि रेलवे साइडिंग से उड़ने वाले कोल डस्ट से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। लोग दमा, खांसी, श्वांस व आंख की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। हर वर्ष खोलार नदी में अस्थायी स्टाप डेम बनाकर जल संरक्षण किया जाता था, लेकिन इस बार पहल नही की गई, जिससे जल संकट गहरा गया है। मुख्यमार्ग में नियमित जल छिड़काव नही किया जा रहा है। उन्होंने अफसरों के सामने स्टाप डेम निर्माण के अलावा धूल पर प्रभावी नियंत्रण, नियमित जल छिड़काव व रेलवे द्वारा लगाए गए हाईट कंट्रोलर की मरम्मत की मांग की। उन्होंने मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। आखिरकार पुलिस व प्रशासन के अफसरों ने रेलवे तथा एसईसीएल के अधिकारियों की मौजूदगी में आंदोलनकारियों से चर्चा की। उन्हें 17 जून तक समस्या का समाधान करने लिखित आश्वासन दिया, तब कहीं जाकर चार घंटे बाद आंदोलन समाप्त हुआ।

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